बर्ड फ़्लू के कारण, लक्षण, इलाज, घरेलू उपाय और बचाव के तरीके - Bird Flu Symptoms, Causes, Treatment, and Prevention in hindi

बर्ड फ़्लू के कारण, लक्षण, इलाज, घरेलू उपाय और बचाव के तरीके - Bird Flu Symptoms, Causes, Treatment, and Prevention in hindi

बर्ड फ़्लू के कारण, लक्षण, इलाज, घरेलू उपाय और बचाव के तरीके (Bird flu causes, symptoms, prevention, treatment, home remedies in hindi): बर्ड फ़्लू को एवियन इनफ़्लुएंज़ा कहा जाता है क्योंकि यह वाइरस से होने वाली बीमारी मुख्यतर पक्षियो में पाई जाती है. 1997 में इसका पहला संक्रमण मनुष्यो में पाया गया था और इसके कारण कई लोगो की मौत हुई है इसीलिए इस वाइरस को गंभीरता से लेना चाहिए. जानिए क्या है बर्ड फ़्लू, इस के कारण, लक्षण, रोकथाम और घरेलू इलाज के तरीके हिन्दी में. 

बर्ड फ़्लू के वाइरस का नाम - Bird flu virus name in hindi

  • एवियन फ़्लू (Avian flu in hindi) या बर्ड इनफ़्लुएंज़ा या बर्ड फ़्लू इस बीमारी का साधारण नाम है. 
  • टेक्निकल नाम इस वाइरस का H5N1 है जो बहुत प्रचलित है और पक्षी और प्राणी के साथ मनुष्यो को भी संक्रमित करके ख़तरनाक साबित होता है. इस का एक और प्रकार है वो है H5N8. 
  • इस बर्ड फ़्लू को एवियन इन्फ्लूएंजा A भी कहा जाता है और इसमे अलग प्रकार के वाइरस है जैसे की H9N2, H7N9, H7N7, H7N3 और H5N1. 
  • HPAI याने ह्यूमन पैथोजेनिक(Human Pathogenic) एवियन इनफ़्लुएंज़ा (Avian Influenza)के नाम से भी यह जाना जाता है. 

बर्ड फ्लू क्या है? – what is bird flu in hindi?

  • व्हाट इस बर्ड फ़्लू मे जानिए की यह एक वाइरस है बर्ड फ्लू वायरस का नाम H5N1 से जाना जाता है और यह बतख द्वारा मुर्गिओं मे फैलाए होने की शंका है और साथ मे पशुओ को भी संक्रमित कर दिया है. 
  • खास करके एशिया के देशो में इस का प्रसाव ज़्यादा है जैसे की इंडिया, बांग्लादेश, चीन, मिश्र, वियतनाम और इंडोनेशिया. 
  • इस वाइरस मे रहे प्रोटीन के आधार पर इनका वर्गीकरण होता है और जो इनफ़्लुएंज़ा A टाइप के वाइरस है वो ज़्यादातर संक्रमित करते है जिस वर्ग मे H1N1, H3N2 ज़्यादा फैले हुए है. 
  • अमेरिका मे पाए जाने वाले बर्ड फ़्लू वाइरस एशिया मे पाए जाने वाइरस से कुछ अलग है और यह H7N9 प्रकार के वाइरस है. 

भारत में बर्ड फ़्लू - Bird Flu in India in hindi

  • हाल की बात करे तो बर्ड फ़्लू, जिसे इंडिया में चिकन फ़्लू के नाम से जाना जाता है, इस बीमारी का प्रकोप या ख़तरा नहीं है और गवर्नमेंट ने यह जाहिर किया है की इंडिया इस बीमारी से मुक्त है. 
  • अक्टूबर  2016 से फरवरी 2017 के बीच भारत के कई प्रान्तो मे एवियन फ़्लू का प्रकोप हुआ था मगर अब इस का शमन हो गया है और यहाँ पर H5N1 ज़्यादा प्रचलित था. 
  • 2015 और उसके पहले एक समय ऐसे था की पोल्ट्री फार्म मे एवियन फ़्लू फैल गया था और लोगो ने चिकन खाना बंद कर दिया था. 

मुर्गियों में बर्ड फ्लू के लक्षण - Bird flu symptoms in chickens in hindi

  • ऐसा माना गया है की जंगली बतखो से मुर्गिओं मे बर्ड फ़्लू वाइरस (bird flu virus in hindi) फैल गया. 
  • मुर्गिओं मे एवियन इनफ़्लुएंज़ा कोई नई बात नहीं है क्योंकि 1878 में भी ऐसी महामारी पाई गई थी और उसके बाद 1950, 1959 , 1995 में 15 बार हुआ है. 
  • 1996 से 2008 के बीच 11 बार और लाखो पक्षियो को यह रोग लग गया. 
  • यह रोग पक्षियो के मल से फैलता है और उनको छूने से और उनके नहाए हुए पानी के माध्यम से फैलता है. 

एवियन फ़्लू के लक्षण मुर्गिओं में - Avian flu symptoms in chickens in hindi

  • जो मुर्गी LPAI प्रकार के वाइरस से संक्रमित हो उसमे मुर्गियों में बर्ड फ्लू के लक्षण (symptoms of bird flu in chickens in hindi) हल्के होते है जैसे की पंख बिखरे हुए, अंडे कम देना और थोड़ीसी सुस्ती. 
  • HPAI वाइरस मुर्गी को लग जाए तो एवियन फ़्लू सिम्पटम्स (avian flu symptoms in hindi) गहरे होते है और उसके अंदर की ग्रंथियो पर गहरा असर पढ़ने से 48 घंटे मे मौत हो सकती  है. 
  • मुर्गियों में बर्ड फ्लू के लक्षण (Bird flu symptoms in chicken) यह है की मुर्गी बर्ड फ़्लू से संक्रमित हो जाए तो उसके वाटलेस (Wattles) चोंच के उपर और नीचे लटकती मासपेशिओ) के रंग मे बदलाव आता है, नाक मे से बहाव होता है, पैर कमजोर हो जाते है, अंडे के छिलके कमजोर होते है या तो आकर बदल जाता है, मुर्गी खाँसती-छींकती  रहती है, दिमाग़ पर असर होने से ठीक से चल नहीं पाती है और फिर साँस लेने मे भी तकलीफ़ हो के एक जगह पर स्थाई पड़ी रहती है. 

कैसे जाने की पक्षी मे बर्ड फ़्लू है? – Bird flu symptoms in birds in hindi? 

  • पक्षी को बर्ड फ़्लू वाइरस लग जाए तो उसमे एवियन फ़्लू सिम्पटम्स नज़र आएँगे जैसे की दिमाग़ अंगो को काबू मे नहीं रख सकता है और पंछी लड़खड़ाता  है.
  • बिना किसी कारण पक्षी मर जाए. 
  • दस्त हो जाए, सर फूल जाए, आँखो मे सूजन हो, नाक मे से पानी बहता है और अंडे कम देती है.
  • खांसना और छींकना भी बर्ड फ़्लू सिम्पटम्स है. 
  • पैर, चोंच के उपर और नीचे वाटलेस का रंग बदल जाना यह बर्ड फ़्लू के लक्षण है. 

बर्ड फ़्लू के लक्षण मनुष्यो मे कैसे पहचाने – How to recognize bird flu symptoms in humans treatment in hindi

  • मनुष्यो मे एवियन इन्फ्लूएंजा के लक्षण (avian influenza symptoms in hindi) कुछ अलग है और पहले तो बुखार आता है| 
  • बर्ड फ़्लू लक्षण एक और है और यह है खाँसी आना और गले मे खराश लगना.
  • यह चिन्ह् तो अन्य वाइरस से भी होते है मगर साथ मे आँखो मे कंजंक्टिवाइटिस(conjunctivitis) हो तो ठोस लक्षण है. 
  • बर्ड फ़्लू लक्षण मनुष्यो मे यह भी है की मासपेशियो मे दर्द होता है. 
  • नज़र अंदाज़ करे तो आगे जाके निमोनिया, शवसन तकलीफ़ और गहरे असर होते है|

बर्ड फ्लू कैसे होता है – Bird flu causes in hindi

  • बर्ड फ़्लू फैलता है जब एक संक्रमित पक्षी दूसरे के करीब हो और उसके मल से, छींकने से, खांसने से और पानी को संक्रमित करने से दूसरे पक्षी मे बर्ड फ़्लू सिम्पटम्स प्रकट होने लगते है और इनफ़्लुएंज़ा फैल जाता है| 
  • मनुष्यो में एवियन फ़्लू तब प्रसरता है जब पोल्ट्री मे काम करने वाला व्यक्ति पक्षिओ से संक्रमित होता है उनके नाक से बहते पानी, उसके पंख और पींछे और मल को या उसके आस पास काम करता है तब यह वाइरस उसके शरीर मे दाखिल हो जाता है. 
  • संक्रमित पक्षी को खाने से या उसके अंडे पक्के खाने से बर्ड फ़्लू का फैलाव नहीं होता है. 

बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय – Bird flu causes and symptoms in hindi

  • बर्ड फ़्लू से संक्रमित होने से बचने के लिए सही कदम उठाए और पहला कदम है की अगर महामारी चल रही हो तो बर्ड फ़्लू टीके लगवा ले. 
  • बर्ड फ्लू से बचाव के लिए संक्रमित पक्षियो से दूर रहे, ऐसे बाज़ारो मे ना जाए जहाँ मुर्गी बिक रही हो और पक्षी के करीब ना जाए ना तो अपने हाथो से उसको छुए. ऐसी जगह से लौटने पर अपने हाथ धो ले. 
  • मुर्गी का मॉस या अंडा खाना हो तो अच्छी तरह धोए दस्ताने पहन के और अच्छी तरह पकाए और आधा कच्चा अंडा ना खाए.
  • ऐसे हालातो में पोल्ट्री फार्म मे ना जाए ना ही बर्ड देखने के लिए जंगल में जाए. 
  • खुद की रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ाए और प्लेट्लेट बढ़ाने के लिए कच्चे पपीते और पपीते के पत्ते का रस हफ्ते मे दो बार सेवन करे. 

बर्ड फ़्लू का इलाज – Bird flu treatment in hindi

  • बर्ड फ़्लू सिम्पटम्स प्रकट हो तो तुरंत टैमी फ़्लू की गोली ले. 
  • कच्चे पपीता का रस या तो पपीते के पत्ते का रस पीए. 
  • लहसुन, काली  मिर्च, प्याज, अदरक और हरी मिर्च से बने सूप का सेवन करे. 
  • आमला, यष्टिमधु, काली मिर्च को मिला के सेवन करे तो जल्दी से रिकवरी आएगी. 
  • तेज बुखार मे शरीर पर भीगे कपड़े की पट्टी करे. 
  • पुदीने के पत्तो और तुलसी के पत्तो का रस मरीज़ को पिलाए. 
  • गहरे लक्षण प्रकट हो जैसे की दस्त, उल्टी, खून आना, बहुत तेज बुखार, साँस लेने मे तकलीफ़ तो तुरंत हॉस्पिटल पहुँचाए मरीज़ को. 
  • साधारण तौर पर स्वस्थ लोगो में हफ्ते 10 दिनों मे एवियन इनफ़्लुएंज़ा लक्षण खुद शमन होते है मगर बर्ड फ़्लू वाइरस के साथ और फ़्लू वाइरस भी हो शरीर मे तो गंभीर परिस्थिति हो सकती है. 

कैसे पहुँचता है इंसानो तक यह बर्ड फ़्लू वाइरस – Mode of transmission of bird flu virus in humans in hindi

  • जो कोई इंसान पक्षियो से जुड़ा हो जैसे की ज़ू(Zoo) मे काम करनेवाला कर्मचारी, पोल्ट्री फार्म मे काम करने वाला कर्मचारी या तो व्यापारी जो मुर्गी बेचता है तो वो संक्रमित हो सकते है पक्षियो के करीब आने से. 
  • बर्ड फ़्लू वाइरस फैलता है पक्षियो के मल द्वारा जिसे ऐसे व्यक्ति छू ले तो उसको रोग लग जाता है. 
  • पक्षी नाक मे से निकलते पानी, छींके और खांसने से हवा मे वाइरस फैल जाता है और करीब कोई व्यक्ति हो तो उसके शरीर मे वाइरस दाखिल हो जाता है. 
  • एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य मे तब फैलता है जब वो मरीज़ का इलाज करता है या तो उस के बिल्कुल करीब रहता है जैसे की कोई परिवार का सदस्य. 

बर्ड फ़्लू के टीके - Bird flu vaccine in hindi

  • बर्ड फ़्लू के टीके लगवाए तो सीमित सुरक्षा मिलती है बर्ड फ़्लू से क्योंकि बर्ड फ़्लू होता है कई अलग प्रकार के वाइरस से. ज़्यादातर वैक्सीन बर्ड फ़्लू के लिए बनाए है वो H5N1 वाइरस और उसके करीबी वाइरस प्रकार के लिए है. 
  • यह बर्ड फ़्लू टीके आपको शायद बाज़ारो मे ना मिले और सिर्फ़ सरकारी हॉस्पिटल मे ही मिले. 
  • टीके पर भरोसा रखने के बजाये खुद को सुरक्षित रखे और इस का ध्यान रहे की संक्रमित ना हो जाए. 

बर्ड फ्लू से बचाव के देसी घरेलू इलाज उपाय – Herbal home remedies for bird flu in hindi

  • क्योंकि बर्ड फ़्लू सिम्पटम्स नज़र अंदाज़ करने से निमोनिया (pneumonia), सेप्सिस (sepsis), ग्रंथियों का निष्क्रिय होना और साँस लेने मे तकलीफ़ हो सकती है और क्योंकि वाइरस की कोई दवाई नहीं है तो बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय (bird flu treatment in hindi) घर पर फ़ौरन शुरू करे.
  • मरीज़ को अलग कमरे मे रखे ताकि संक्रमण फैल ना जाए और उसका इलाज करने वाला भी ध्यान रखे. 
  • मरीज़ को बुखार हो तो ठंडे पानी की पट्टी लगाते रहे. 
  • मरीज़ को नींम के पत्तो का रस पिलाए, अदरक का रस, लहसुन, प्याज, काली मिर्च और हरी मिर्च का सूप पिलाए और उसको आराम करवाए. 
  • तुलसी का रस नियमित पिलाए क्योंकि तुलसी उत्तम एंटी-वायरल है. 
  • कच्चे पपीते का रस दे और पपीते के पत्तो का रस दिन मे तीन बार पिलाए. 
  • अडूसा (Ardusi) के पत्ते का रस दे ताकि फेफड़े सॉफ रहे और बलगम भर ना जाए. 
  • ग्रीन टी का काढ़ा पिलाए शहद के साथ और साथ मे पुदीने के पत्ते, अदरक और नींबू डाल के उबाले काढ़ा बनाते समय. 

आयुर्वेद में बर्ड फ़्लू का  इलाज – Bird flu ayuvedic Treatment in hindi

  • आश्चर्य की बात है की आयुर्वेद के पुराने ग्रंथो में भी इस प्रकार के रोग का उल्लेख है सुश्रुत संहिता मे है की पक्षी आकाश से गिर पड़े और प्राणी और व्यक्तियो की आँखों मे लालाश और सूजन हो तो इस का योग्य उपाय करे. 
  • आयुर्वेद के सुश्रुत संहिता मे बताया गया है की हवा को शुद्ध करने के लिए लाक, हल्दी, पिपली, लोंग, दालचीनी, अतिविश और बहेड़ा को जलाए, ना की पक्षियो को मारे. 
  • रोग हो जाए तो ऐसे मरीज़ का बर्ड फ़्लू में आयुर्वेदिक इलाज मे अतिविश, बहेड़ा, पिपली, इलाइची, दालचीनी, लोंग, तगर जैसी जड़ी बूटीओ का काढ़ा बना के नियमित पिलाते रहे. 
  • देसी आयुर्वेदिक उपाय मे यष्टिमधु, काली मिर्च, शहद को मिला के सेवन करे, लहसुन, हरी मिर्च और प्याज खाए और तुलसी और नींम के पत्तो का रस पीते रहे. 

प्राकृतिक इलाज बर्ड फ़्लू के लिए - Bird flu natural cure at Home in hindi

  • बर्ड फ़्लू ट्रीटमेंट मे प्राकृतिक तरीके का इस्तेमाल करे जैसे की भाप दे मरीज़ को और ऐसे पानी मे युकलिप्टुस(eaucalyptus) का तेल डाले, लोंग का तेल डाले और चाय  की पत्ती डाल के पानी उबाले. इससे शवसन नली सॉफ रहेगी. 
  • क्योंकि वाइरस की दवाई नहीं है और प्राकृतिक रूप से शमन होता है तो मरीज़ को आराम करना चाहिए और पानी खूब पीए और वो भी गरम पानी. पानी से बेहतर है की ऐसा पानी बनाए जिस मे अदरक, काली मिर्च, जीरा, नींम के पत्ते, प्याज और लहसुन डाल के उबाला हो तो शीघ्र ही मरीज़ ठीक हो जाता है. 
  • गरम दूध मे हल्दी डाले और चुटकी दालचीनी हो तो भी प्राकृतिक ढंग से बर्ड फ़्लू लक्षण का शमन होगा. 

यह है बर्ड फ़्लू के बारे में जानकारी और जानकारी की इससे कैसे बच के रहे और एवियन इनफ़्लुएंज़ा का इलाज घर पर कैसे करे. वैसे तो ख़तरा कम है बर्ड फ़्लू से फिर भी ध्यान रखना ज़रूरी है|

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1 Comments

रूपेश कुमार , Oct 02, 2017

कच्चे पपीते का रस या पपीते के पतो का रस पिएं जब आपको बर्ड फ़्लू हो तो तो टेमी फ़्लू की गोली लें पुदीने के पते और तुलसी के पते का रस मरीज को पिलाएँ तेज बुखार में शरीर पर गीली पटी करें आँवला हनी और काली मिर्च को मिलाकर सेवन करें जल्दी सवस्थ हो जाएँगे लहसुन प्याज अद्रक काली मिर्च हरी मिर्च का सूप बनाकर सेवन करें जल्दी ठीक हो जाएँगे लेकिन अगर आपको मरीज में गहरे लक्षण दिखें जैसे कि दस्त उल्टी खून आना बहुत तेज बुखार का होना या साँस लेने में तकलीफ़ का होना हो तो मरीज को बिना देरी किए जल्दी से नज़दीक के हॉस्पिटल ले जाएँ|